वॉह जनाब वॉह...
डायरियों में बन्द हमारे तुम्हारे कुछ शब्दों से...
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Tuesday, September 5, 2017
मेरी खता क्या थी ...
पहले इखट्ठा कर लूं सारा दर्द अपने सीने में,
फिर तुझसे मिलूंगा और पूछुंगा की मेरी खता क्या थी।
विक्की कोहली...
Monday, September 4, 2017
सांस कहाँ आती है ...
तुझ बीन जिंदा रहना मेरी मौत ही तो है,
सांस कहाँ आती इस जिस्म में,
तेरे मुझसे रूठकर जाने के बाद।
Saturday, September 2, 2017
पता है अक्सर आप वही देखते हो जो आप देखना चहते हो,
अब इसमें मेरा क्या कसूर की उन्होंने मुझमे अक्सर बुराई ही देखी, कभी मेरा प्यार ना देखा।
विक्की कोहली...
Thursday, August 31, 2017
बेवफा...
अपनी मुस्कुराहटो के पीछे छिपा के इन आसुओं हस्ते रहेंगे हम,
किसी से ना कहेंगे कि हमारा बेवफा निकला सनम।
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