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Tuesday, September 5, 2017

मेरी खता क्या थी ...




पहले इखट्ठा कर लूं सारा दर्द अपने सीने में,
फिर तुझसे मिलूंगा और पूछुंगा की मेरी खता क्या थी।

विक्की कोहली...

Monday, September 4, 2017

सांस कहाँ आती है ...



    तुझ बीन जिंदा रहना मेरी मौत ही तो है,
    सांस कहाँ आती इस जिस्म में,
    तेरे मुझसे रूठकर जाने के बाद।

Saturday, September 2, 2017




पता है अक्सर आप वही देखते हो जो आप देखना चहते हो,
अब इसमें मेरा क्या कसूर की उन्होंने मुझमे अक्सर बुराई ही देखी, कभी मेरा प्यार ना देखा।

विक्की कोहली...

Thursday, August 31, 2017

बेवफा...




  अपनी मुस्कुराहटो के पीछे छिपा के इन आसुओं  हस्ते रहेंगे हम,

          किसी से ना कहेंगे कि हमारा बेवफा निकला सनम।

Saturday, June 30, 2012

ए मुझसे रोज मिलने वाले दोस्त

ए मुझसे रोज मिलने वाले दोस्त,
      कहीं तू मेरा यार न हो जाये।
मिले नहीं कितने दिनोसे हम,
      कहीं ये आंखे बेकार न हो जाए।
    

Tuesday, May 31, 2011

शायद तेरे दिल पर लिखा मेरा नाम जरुर हैं।

तेरे दिल पे तेरा इक्तेयार जरुर हैं,

शायद तेरे दिल पर लिखा मेरा नाम जरुर हैं।

आँखो में समेटे कही न कही वो प्यार जरुर हैं,

शायद तेरे दिल पर लिखा मेरा नाम जरुर हैं।

लिखते हैं कौरे कागज़ पर दास्ताने अपने प्यार की,

ये बात आम जरुर हैं,

शायद तेरे दिल पर लिखा मेरा नाम जरु हैं।









लिखते हैं हथैली पर किसी का नाम और लिख कर मिटा देते हैं,

दोस्तो को मिला ये पैगाम जरुर हैं,

शायद तेरे दिल पर लिखा मेरा नाम जरुर हैं।

Thursday, May 26, 2011

हाले दद्र...


दिल में दद्र इतना था के भुला न सके,

दिल पर जो जख्म था दिखा न सके।

मौहब्बत में यारो हमने इतनी चोट खाई,

के अपना हाले दद्र भी उनको सुना न सके॥

Sunday, May 22, 2011

प्यार...


प्यार एसा शब्द हैं, जिसे बताया नही जाता।

प्यार कुदरत का नाम हैं, जिसे सुनाया नही जाता॥

प्यार ही एसा तीर्थ हैं, जिसे पुरा न किया।

प्यार ही एसी चीज़ हैं, जिसे भुलाया नही जाता॥

Friday, May 20, 2011

जिस्में अमानत...



दर्दे दिल उनसे पुछो,

जिनको हमने दिल दिया हैं

क्योंकि दिल तो उन्ही के पास हैं,

हम तो जिस्में अमानत लिये बैठे हैं॥

साखी...


अपनी आँखो से पीला दे साखी,

और जी लेंगे सारे द्रद बुला कर साखी।

प्यार के या न कर बस आँखो से पीलाये जा,

हम तुम्हे अपनी यादो में बसा लेगें साखी॥

Friday, April 1, 2011

इन हाथो से कुछ लिखा


इन हाथो से कुछ लिखा ,

उस लिखे को मिटाने के बहाने रोय।

जुबा से कुछ कहा,

अज फिर उस कहे को जुबा पर लाने के बहाने रोये।

जला दिये थे जो राज़ जिन्दगी से,

आज फिर उन्हे सिने से लगाने के बहाने रोये।

बस इस रोने की तसवीर को अक्सर,

बारिश की आड़ में छुपाने के बहाने रोये।

वक्त को फुरसत नही...


वक्त को फुरसत नही हमे रूलाने से,

अब करे भी तो क्या गीला करे जमाने से।