वॉह जनाब वॉह...
डायरियों में बन्द हमारे तुम्हारे कुछ शब्दों से...
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Saturday, June 30, 2012
ए मुझसे रोज मिलने वाले दोस्त
ए मुझसे रोज मिलने वाले दोस्त,
कहीं तू मेरा यार न हो जाये।
मिले नहीं कितने दिनोसे हम,
कहीं ये आंखे बेकार न हो जाए।
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