वॉह जनाब वॉह...
डायरियों में बन्द हमारे तुम्हारे कुछ शब्दों से...
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Monday, September 4, 2017
सांस कहाँ आती है ...
तुझ बीन जिंदा रहना मेरी मौत ही तो है,
सांस कहाँ आती इस जिस्म में,
तेरे मुझसे रूठकर जाने के बाद।
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